Thursday, 22 January 2015

बीत गया एक और साल

वक्त अभी बदला नहीं,
रात अभी सोयी नहीं
दिन अभी जागा नहीं,
पल अभी सिमटा नहीं

लोग मिले,
आए-गए
कुछ ठहरे अपने साथ,
कुछ खिलाफ

दिन बीत गये,
और हफ्ते, महीने, साल
ना हाल हमसे पूछा किसीने,
ईस्सी बोझ को लिये जीये फ़िलहाल

बीत गया एक और साल,
दिए कुछ दर्द के मलाल
और कुछ दिए सुख के पल
और ढेर सारी आशा के बेहतर होगा कल

स्वरोम

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