Tuesday, 16 December 2014

अब तो बस करो अपने खुदा से तो डरो

कैसे ये आतंकवादी,
कैसी ये दहशतगर्दी
"बुजदिली" है ये, मासुम बच्चों की जान लेली,
कैसे ये बेदर्दी

पाकिस्तान में मासूम बच्चों पर हुआ हमला,
फुल खिलने से पहले तालिबानी आतंकियों ने तोड़ दिया वो "गमला"
मासूमों के सिने पर मारी है गोलियाँ,
खुदा के बन्दों ने ही खुद के मुल्क में माँ बाप की खाली कर दी झोलियाँ

कितने मर चुके, कितनेही अभी घायल है,
भले मजहब दुसरा है मगर आतंकित जख्मी दर्दभरा हर ये पल है
धर्म के नाम पर अधर्म,
बच्चो को भोगना पड़ा बड़ों का कर्म

कौन है कहा से पैदा हुआ ये संगठन देश तालिबान,
पाकिस्तान के रहमो करम पर ही पलती थी इसकी जान
पाकीस्तानी सेना ने ही इस तालिबान को बड़ा किया,
खुद पाकिस्तान ने इस कमजोर लेटे को खड़ा किया

आज उसी तालिबान ने उसी के पालनकर्ता के मासूमो को काट दिया,
धर्म के नाम पर कत्लेआम करनेवाली नस्लों को आपस में बाँट दिया
बस कहनेभर को दहशतगर्दी खत्म और समय का देखो कैसा संजोग रहा है,
पाकिस्तान ने बोया ये बिज आज वो खुद भुगत रहा है

तुम्हारे देश में स्कुल में घुसकर उन आतंकियों ने बच्चों को मौत के घाट उतारा,
कहाँ गयी फिर वो सेना क्या अब भी गर्म नहीं हुआ जवा खून में पारा
कर्मो के फल इन मासूमो के हाथों से न भरो,
सुधरकर कुछ तो आइनेसा साफ़ करो

मरता हुआ वो मासूम तक जाते जाते कह गया,
अब तो बस करो
अपने ही खुदा के बंदे हो,
थोड़ा तो खुदा से डरो

थोड़ा तो खुदा से...

स्वरोम

No comments:

Post a Comment