प्यार चाहिए तो समर्पण खर्च करना पड़ता है
विश्वास चाहिए तो निष्ठा खर्च करनी पड़ती है
साथ चाहिए तो वक्त खर्च करना पड़ता है
कौन कहता है की रिश्ते मुफ्त में मिलते है?
मुफ्त में तो यहाँ हवा भी नहीं मिलती
एक सांस ले सकते है पर एक सांस छोड़ने के बाद ही
स्वरोम
विश्वास चाहिए तो निष्ठा खर्च करनी पड़ती है
साथ चाहिए तो वक्त खर्च करना पड़ता है
कौन कहता है की रिश्ते मुफ्त में मिलते है?
मुफ्त में तो यहाँ हवा भी नहीं मिलती
एक सांस ले सकते है पर एक सांस छोड़ने के बाद ही
स्वरोम
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